Satellite Shankar Movie Review: टुकड़ों में मनोरंजन करती है Sooraj Pancholi की फिल्म

जानिए कैसी है इस वीकेंड पर रिलीज हुई सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) की फिल्म सैटेलाइट शंकर (Satellite Shankar) ?

सलमान खान (Salman Khan) से बैनर से बॉलीवुड में कदम रखने वाले कलाकार सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) फिल्म सैटेलाइट शंकर (Satellite Shankar) से दोबारा पर्दे पर लौटे हैं। साल 2015 के बाद सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) की यह पहली फिल्म है, जिस कारण कई सारे दर्शक उन्हें भूल भी चुके हैं। सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) की सैटेलाइट शंकर (Satellite Shankar) के सामने दो बड़ी चुनौतियां है; पहली तो यह कि इसे दर्शकों का मनोरंजन करना है और दूसरी यह कि इसके माध्यम से सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) को दोबारा दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनानी है। फिल्म सैटेलाइट शंकर (Satellite Shankar) इन दोनों चुनौतियों पर कितनी खरी उतरी है, आइए जानते हैं:

फिल्म की कहानी:

फिल्म की कहानी भारतीय सैनिक शंकर (सूरज पंचोली) के बारे में है, जो कई सारी भाषाएं बोलता है। यह सैनिक बॉर्डर पर लम्बे समय से तैनात है और कुछ दिनों की छुट्टियों को लिए घर जाना चाहता है। शंकर को ये छुट्टियां मिल भी जाती हैं लेकिन इस शर्त पर कि उसे तय किए हुए दिन पर दोबारा रिपोर्ट करना है। शंकर के घर जाने और घर से वापस आने के बीच जो घटनाएं घटित होती हैं, यह फिल्म उन्हें ही दर्शकों के सामने पेश करती है। फिल्म में बॉलीवुडिया मसालों के साथ-साथ एक खास मैसेज भी है, जो फिल्म देखने के दौरान ही पता चले तो अच्छा है।

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फिल्म सैटेलाइट शंकर में क्या है खास:

फिल्म के लिए सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) ने कई सारी भाषाएं बोली हैं, जो मेहनत पर्दे पर साफ नजर आती है। फिल्म के दौरान सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) काफी ईमानदार नजर आते हैं, जिसके लिए उनकी तारीफ होनी चाहिए। फिल्म हीरो वाले सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) की तुलना अगर सैटेलाइट शंकर वाले सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) से की जाए तो जमीन-आसमान का फर्क नजर आता है। फिल्म में उनकी डायलॉग डिलीवरी और एक्शन कई लोगों को पसंद आ सकता है।

फिल्म की नकारात्मक बातें:

फिल्म की सबसे नकारात्मक बात यह है कि ये दर्शकों को शंकर की जर्नी के लिए उत्साहित करने में नाकामयाब रहती है। फिल्म में शंकर लोगों की मदद करता है, उन्हें देश के प्रति जागरुक करता है लेकिन फिर भी दर्शक इसके लिए वो फील नहीं कर पाते हैं, जो करना चाहिए। फिल्म सैटेलाइट शंकर लगातार उसी चीज के आसपास घूमती रहती है, जिससे शुरू हुई थी। इसकी पूरे देश में ट्रैवल करती है लेकिन कहीं भी लेकर जाने में नाकामयाब रहती है। फिल्म की लम्बाई की बात की जाए तो इसे 10 मिनट कम किया जा सकता था। इससे सैटेलाइट शंकर की कहानी और भी ज्यादा इंट्रेस्टिंग बन सकती थी।

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आखिरी फैसला:

फिल्म सैटेलाइट शंकर को आप सूरज पंचोली (Sooraj Pancholi) के लिए देख सकते हैं, जो कई सालों के बाद पर्दे पर लौटे हैं। इसके अलावा फिल्म में ऐसा कुछ खास नहीं है, जिसके लिए आप थिएटर का रुख करें। बॉलीवुड लाइफ की तरफ से फिल्म को 1.5 स्टार दिए जाते हैं।

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